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mahabharat 7.147.64-65h: हे पुरुषश्रेष्ठ! तत्पश्चात् सात्यकि ने अपने तीखे बाणों से कर्ण के चारों श्वेत घोड़ों को मार डाला और उसकी ध्वजा को काटकर उसके रथ को सैकड़ों टुकड़ों में तोड़ डाला तथा आपके पुत्र के सामने ही कर्ण को रथहीन कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 64-65h
 
 
श्लोक  7.147.64-65h 
अश्वांश्च चतुर: श्वेतान् निजघान शितै: शरै:।
छित्त्वा ध्वजं रथं चैव शतधा पुरुषर्षभ॥ ६४॥
चकार विरथं कर्णं तव पुत्रस्य पश्यत:।
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! तत्पश्चात् सात्यकि ने अपने तीखे बाणों से कर्ण के चारों श्वेत घोड़ों को मार डाला और उसकी ध्वजा को काटकर उसके रथ को सैकड़ों टुकड़ों में तोड़ डाला तथा आपके पुत्र के सामने ही कर्ण को रथहीन कर दिया।
 
O best of men! Thereafter Satyaki killed all the four white horses of Karna with his sharp arrows and after cutting his flag broke the chariot into hundreds of pieces and rendered Karna chariotless in front of your son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)