Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.147.59-60h: हे शत्रुराज! कर्ण उन दोनों की मृत्यु पर विलाप करता हुआ महासर्प के समान फुफकार रहा था और लंबी-लंबी साँसें ले रहा था। वह युद्ध में अत्यन्त कुपित होकर सात्यकि की ओर ऐसे देख रहा था मानो उसे जलाकर भस्म कर देगा। वह बार-बार बड़े बल से सात्यकि पर आक्रमण कर रहा था। | mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे शत्रुराज! कर्ण उन दोनों की मृत्यु पर विलाप करता हुआ महासर्प के समान फुफकार रहा था और लंबी-लंबी साँसें ले रहा था। वह युद्ध में अत्यन्त कुपित होकर सात्यकि की ओर ऐसे देख रहा था मानो उसे जलाकर भस्म कर देगा। वह बार-बार बड़े बल से सात्यकि पर आक्रमण कर रहा था।
O King of enemies! Karna was mourning the death of both of them and was hissing and taking long breaths like a great serpent. He was furious in the battle and was looking at Satyaki with his eyes as if he would burn him to ashes. He attacked Satyaki again and again with great force. 59 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥