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mahabharat 7.147.52-54h: महाराज! उन दोनों का वह युद्ध देखकर सबके मन मोह से भर गए। राजन! सब लोग दर्शकों की भाँति उन दोनों श्रेष्ठ वीरों के उस अलौकिक युद्ध और दारुक के पराक्रम को देखने लगे। हाथी, घोड़े, रथ और मनुष्यों से युक्त वह चतुरंगिणी सेना भी युद्ध में पराजित हो गई। 52-53 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 52-54h
 
 
श्लोक  7.147.52-54h 
उपारमत तत् सैन्यं सरथाश्वनरद्विपम्॥ ५२॥
तयोर्दृष्ट्वा महाराज कर्म सम्मूढचेतस:।
सर्वे च समपश्यन्त तद् युद्धमतिमानुषम्॥ ५३॥
तयोर्नृवरयो राजन् सारथ्यं दारुकस्य च।
 
 
अनुवाद
महाराज! उन दोनों का वह युद्ध देखकर सबके मन मोह से भर गए। राजन! सब लोग दर्शकों की भाँति उन दोनों श्रेष्ठ वीरों के उस अलौकिक युद्ध और दारुक के पराक्रम को देखने लगे। हाथी, घोड़े, रथ और मनुष्यों से युक्त वह चतुरंगिणी सेना भी युद्ध में पराजित हो गई। 52-53 1/2॥
 
Maharaj! Seeing that fight between those two, everyone's mind was filled with fascination. Rajan! Everyone, like spectators, started watching that superhuman fight between those two best heroes and Daruk's heroic deed. That Chaturangini army consisting of elephants, horses, chariots and humans was also defeated in the war. 52-53 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)