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mahabharat 7.147.5: इस प्रकार दोनों दिशाओं से हो रही बाणों की भारी वर्षा से पीड़ित होकर महाबाहु महारथी अर्जुन अत्यंत व्याकुल हो गए ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.147.5 
स तथा शरवर्षाभ्यां सुमहद्‍भ्यां महाभुज:।
पीड्यमान: परामार्तिमगमद् रथिनां वर:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार दोनों दिशाओं से हो रही बाणों की भारी वर्षा से पीड़ित होकर महाबाहु महारथी अर्जुन अत्यंत व्याकुल हो गए ॥5॥
 
Thus afflicted by the heavy shower of arrows from two directions, the mighty-armed Arjuna, the best of charioteers, became extremely distressed. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)