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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 49-50h
 
 
श्लोक  7.147.49-50h 
चक्ररक्षावपि तदा युधामन्यूत्तमौजसौ॥ ४९॥
धनंजयरथं हित्वा राधेयं प्रत्युदीयतु:।
 
 
अनुवाद
उसी समय चक्ररक्षक युधामन्यु और उत्तमौजन ने भी धनंजय का रथ छोड़ दिया और कर्ण पर ही आक्रमण कर दिया।
 
At that time the chakra-protectors Yudhamanyu and Uttamaujane also left Dhananjaya's chariot and attacked Karna only.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)