Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.147.46-47h: भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञा पाकर शिनि के पौत्र सात्यकि दारुकद्वार से जुते हुए अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी उस रथ पर आरूढ़ हुए ॥46 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स केशवस्यानुमते रथं दारुकसंयुतम्॥ ४६॥
आरुरोह शिने: पौत्रो ज्वलनादित्यसंनिभम्।
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञा पाकर शिनि के पौत्र सात्यकि दारुकद्वार से जुते हुए अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी उस रथ पर आरूढ़ हुए ॥46 1/2॥
After receiving the permission of Lord Shri Krishna, Shini's grandson Satyaki mounted on that chariot as bright as fire and sun, plowed by Darukdwara. 46 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥