Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.147.40: प्रभु ! भगवान श्रीकृष्ण के मन में पहले ही यह बात आ गई थी कि आज वीर सात्यकि सोमदत्त के पुत्र भूरिश्रवा से पराजित होंगे ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  7.147.40 
पूर्वमेव हि कृष्णस्य मनोगतमिदं प्रभो।
विजेतव्यो यथा वीर: सात्यकि: सौमदत्तिना॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
प्रभु ! भगवान श्रीकृष्ण के मन में पहले ही यह बात आ गई थी कि आज वीर सात्यकि सोमदत्त के पुत्र भूरिश्रवा से पराजित होंगे ॥40॥
 
Lord! It had already come to Lord Krishna's mind that today the brave Satyaki would be defeated by Bhurishrava, son of Somdutt. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)