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mahabharat 7.147.36: हे कुन्तीपुत्र! मैं उस दुष्टात्मा का अन्त जानता हूँ, जब तुम उसे पृथ्वी पर अपने तीखे बाणों से मार डालोगे।'   |   mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.147.36 
अहं ज्ञास्यामि कौन्तेय कालमस्य दुरात्मन:।
यत्रैनं विशिखैस्तीक्ष्णै: पातयिष्यसि भूतले॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! मैं उस दुष्टात्मा का अन्त जानता हूँ, जब तुम उसे पृथ्वी पर अपने तीखे बाणों से मार डालोगे।'
 
O son of Kunti! I know the end of that evil soul, when you will kill him on the earth with your sharp arrows.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)