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mahabharat 7.147.25-26h: ‘मैंने युद्धस्थल में उन महात्मा आचार्य पर बाण वर्षा करके उनके वचनों का पालन नहीं किया।   |   mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.147.25-26h 
तदिदं वचनं साधोराचार्यस्य महात्मन:॥ २५॥
नानुष्ठितं तमेवाजौ विशिखैरभिवर्षता।
 
 
अनुवाद
‘मैंने युद्धस्थल में उन महात्मा आचार्य पर बाण वर्षा करके उनके वचनों का पालन नहीं किया।
 
‘I did not obey the words of that great Mahatma Acharya by showering arrows on him in the battlefield. 25 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)