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mahabharat 7.147.10: अपने स्वामी को बाणों से पीड़ित और व्यथित देखकर तथा उन्हें मरा हुआ समझकर सारथी उन्हें युद्धभूमि से दूर ले गया।   |   mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.147.10 
विह्वलं तमभिज्ञाय भर्तारं शरपीडितम्।
हतोऽयमिति च ज्ञात्वा सारथिस्तमपावहत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अपने स्वामी को बाणों से पीड़ित और व्यथित देखकर तथा उन्हें मरा हुआ समझकर सारथी उन्हें युद्धभूमि से दूर ले गया।
 
Seeing his master suffering from the arrows and in a state of distress and thinking him to be dead, the charioteer took him away from the battle-field.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)