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mahabharat 7.146.97: जब अर्जुन निरन्तर बाण चला रहे थे, तब लोगों को केवल उनका गोलाकार धनुष ही दिखाई दे रहा था और चारों ओर फैले हुए उनके बाण भी दिखाई दे रहे थे ॥97॥   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  7.146.97 
धनुर्मण्डलमेवास्य दृश्यते स्मास्यत: सदा।
सायकाश्च व्यदृश्यन्त निश्चरन्त: समन्तत:॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
जब अर्जुन निरन्तर बाण चला रहे थे, तब लोगों को केवल उनका गोलाकार धनुष ही दिखाई दे रहा था और चारों ओर फैले हुए उनके बाण भी दिखाई दे रहे थे ॥97॥
 
While Arjuna was continuously shooting arrows, only his circular bow was visible to the people and his arrows spreading all around were also visible. ॥97॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)