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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  7.146.91 
हयाश्च पतितारोहा: पत्तयश्च नराधिप।
प्रदुद्रुवुर्भयाद् राजन् धनंजयशराहता:॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! हे राजन! घुड़सवार गिर पड़े थे और घोड़े तथा पैदल सैनिक धनंजय के बाणों से बुरी तरह घायल होकर डर के मारे भाग रहे थे।
 
O lord of men! O king! The horsemen had fallen down and the horses and foot soldiers, badly wounded by Dhananjaya's arrows, were running away in fear. 91.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)