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mahabharat 7.146.89-90: महाराज! आपके योद्धाओं के हजारों वेगवान और मतवाले हाथी, जिनके सवार मारे गये थे और जिनके शरीर बाणों से बिंध गये थे, अपनी-अपनी सेनाओं को कुचलते हुए तथा पीड़ा से चिल्लाते हुए युद्धभूमि में क्रोधपूर्वक दौड़ने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 89-90
 
 
श्लोक  7.146.89-90 
मत्ता वेगवतो राजंस्तावकानां रणाङ्गणे॥ ८९॥
हस्तिनश्च हतारोहा दारिताङ्गा: सहस्रश:।
स्वान्यनीकानि मृद्नन्त आर्तनादा: प्रदुद्रुवु:॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आपके योद्धाओं के हजारों वेगवान और मतवाले हाथी, जिनके सवार मारे गये थे और जिनके शरीर बाणों से बिंध गये थे, अपनी-अपनी सेनाओं को कुचलते हुए तथा पीड़ा से चिल्लाते हुए युद्धभूमि में क्रोधपूर्वक दौड़ने लगे।
 
King! Thousands of your warriors' swift and intoxicated elephants, whose riders had been killed and whose bodies were all pierced by arrows, started running furiously on the battlefield, trampling their own armies and uttering cries of pain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)