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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  7.146.83 
द्विपान् द्विपगतांश्चैव हयान् हयगतानपि।
तथा स रथिनश्चैव न्यहन् रुद्र: पशूनिव॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
जैसे प्रलयंकारी रुद्र समस्त प्राणियों का नाश कर देते हैं, उसी प्रकार उन्होंने हाथियों और सवारों, घोड़ों और सवारों, तथा रथों और सारथिओं का भी नाश कर दिया। 83.
 
Just as the destructive Rudra annihilates all creatures, so he destroyed elephants and elephant riders, horses and horse riders, as well as chariots and charioteers. 83.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)