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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  7.146.80 
तत: शरमयं जालं तुमुलं पाकशासनि:।
व्यसृजत् पुरुषव्याघ्रस्तव सैन्यजिघांसया॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर इन्द्रपुत्र सिंह ने आपकी सेना का नाश करने की इच्छा से बाणों का भयंकर जाल फैलाना आरम्भ कर दिया।
 
Then, the lion-man Indra's son, wishing to destroy your army, began spreading a dreadful net of arrows. 80.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)