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mahabharat 7.146.79: इस प्रकार बारम्बार बाणों से आच्छादित होकर कुरुकुल को आनन्द पहुँचाने वाले अपराजित योद्धा कुन्तीकुमार अत्यन्त कुपित हो गये ॥79॥   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  7.146.79 
संछाद्यमान: कौन्तेय: शरजालैरनेकश:।
अक्रुध्यत् स महाबाहुरजित: कुरुनन्दन:॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बारम्बार बाणों से आच्छादित होकर कुरुकुल को आनन्द पहुँचाने वाले अपराजित योद्धा कुन्तीकुमार अत्यन्त कुपित हो गये ॥79॥
 
Thus, being repeatedly covered with arrows, the undefeated warrior Kunti Kumar, who had brought joy to the Kurukula, became very angry. 79॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)