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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  7.146.64 
योगमत्र विधास्यामि सूर्यस्यावरणं प्रति।
अस्तंगत इति व्यक्तं द्रक्ष्यत्येक: स सिन्धुराट्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
इसलिए मैं यहाँ सूर्य को ढकने के लिए एक उपाय बनाऊँगा, जिससे केवल सिन्धुराज ही सूर्यास्त को स्पष्ट रूप से देख सकेगा।
 
‘Therefore I will devise a device to cover the Sun here, so that only Sindhuraj alone will be able to see the sun setting clearly. 64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)