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mahabharat 7.146.62: महाबाहु पार्थ! यह सिन्धुराज जयद्रथ प्राण बचाने की इच्छा से भयभीत होकर खड़ा है और छः वीर महारथियों ने उसे अपने बीच में रोक रखा है ॥62॥   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  7.146.62 
एष मध्ये कृत: षड्‍‍भि: पार्थ वीरैर्महारथै:।
जीवितेप्सुर्महाबाहो भीतस्तिष्ठति सैन्धव:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु पार्थ! यह सिन्धुराज जयद्रथ प्राण बचाने की इच्छा से भयभीत होकर खड़ा है और छः वीर महारथियों ने उसे अपने बीच में रोक रखा है ॥62॥
 
Mighty-armed Partha! This Sindhuraj Jayadratha is standing in fear with the desire to save his life and six brave maharathis have kept him between them. 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)