Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.146.58-59: परन्तु अर्जुन ने जयद्रथ के छोड़े हुए बाणों को तुरन्त ही काट डाला और दो बाणों से एक साथ ही सिन्धुर नरेश के सारथि का मस्तक तथा उसके आभूषणों से सुसज्जित ध्वज को भी काट डाला। | mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स विक्षिप्यार्जुनस्तूर्णं सैन्धवप्रहितान् शरान्॥ ५८॥
युगपत् तस्य चिच्छेद शराभ्यां सैन्धवस्य ह।
सारथेश्च शिर: कायाद् ध्वजं च समलंकृतम्॥ ५९॥
अनुवाद
परन्तु अर्जुन ने जयद्रथ के छोड़े हुए बाणों को तुरन्त ही काट डाला और दो बाणों से एक साथ ही सिन्धुर नरेश के सारथि का मस्तक तथा उसके आभूषणों से सुसज्जित ध्वज को भी काट डाला।
But Arjuna immediately cut off the arrows shot by Jayadratha and with two arrows simultaneously cut off the head of the charioteer of the King of Sindhuras as well as his flag decorated with ornaments. 58-59.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥