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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  7.146.56-57h 
स वराहध्वजस्तूर्णं गार्धपत्रानजिह्मगान्।
क्रुद्धाशीविषसंकाशान् कर्मारपरिमार्जितान्॥ ५६॥
आकर्णपूर्णान् चिक्षेप फाल्गुनस्य रथं प्रति।
 
 
अनुवाद
उनके ध्वज पर वराह का चिह्न था। उन्होंने अपने धनुष से, जो गिद्ध के समान, सीधी चाल वाले, सुनारों द्वारा चमकाए हुए और क्रोधित विषधर सर्प के समान प्रतीत होते थे, अर्जुन के रथ की ओर शीघ्रता से अनेक बाण छोड़े।
 
His flag had the symbol of Varaha. He quickly shot many arrows from his bow, which were vulture-like, straight-moving, polished by goldsmiths and looked like an enraged poisonous snake, towards Arjuna's chariot. 56 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)