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mahabharat 7.146.53: उन्होंने अश्वत्थामा को पचास बाणों से और वृषसेन को तीन बाणों से घायल कर दिया। कृपाचार्य को उन्होंने केवल नौ बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.146.53 
द्रौणिं पञ्चाशताविध्यद् वृषसेनं त्रिभि: शरै:।
कृपायमाण: कौन्तेय: कृपं नवभिरार्दयत्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अश्वत्थामा को पचास बाणों से और वृषसेन को तीन बाणों से घायल कर दिया। कृपाचार्य को उन्होंने केवल नौ बाणों से घायल कर दिया।
 
He pierced Ashvatthama with fifty arrows and Vrishasena with three arrows. He graciously shot Kripacharya with only nine arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)