Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.146.31-38h: अर्जुन ने कायरों में भय उत्पन्न करने वाली वैतरणी के समान एक अत्यन्त भयानक, प्रचण्ड और रक्तरंजित नदी प्रवाहित की, जो सैकड़ों निर्जीव योद्धाओं के शरीरों को बहा ले गई। उसकी मज्जा और चर्बी ही उसकी कीचड़ थी। रक्त ही बहता था और उसकी लहरें उठती थीं। योद्धाओं के प्राणों और अस्थियों से व्याप्त वह नदी अथाह प्रतीत होती थी। उसके बाल नदी के तृण और घास थे। योद्धाओं के कटे हुए सिर और भुजाएँ किनारों पर छोटी-छोटी चट्टानों का काम दे रही थीं। छाती की टूटी हुई हड्डियों के कारण वह दुर्गम हो रही थी। उसके भीतर विचित्र ध्वजाएँ और पताकाएँ पड़ी थीं। वह छत्रों और धनुषरूपी तरंगों की मालाओं से सुशोभित थी। निर्जीव प्राणी उसके विशाल शरीर के अंग थे, वह हाथियों के मृत शरीरों से भरी हुई थी, रथरूपी सैकड़ों नावें उस पर तैर रही थीं, घोड़ों के समूह उसके तट थे, रथों के पहिये, जुए, डण्डे, धुरे और गदाओं के कारण नदी अत्यंत दुर्गम प्रतीत हो रही थी। इसमें प्रवेश करना कठिन था क्योंकि यह भालों, तलवारों, बरछियों, कुल्हाड़ियों और बाणों के रूप में सर्पों से भरा हुआ था। इसके अंदर कौए और कौए जैसे जानवर रहते थे, जो बड़े मगरमच्छ थे। मगरमच्छ रूपी सियारों के निवास के कारण इसकी क्रूरता और भी बढ़ गई थी। गिद्ध इसमें भयंकर और बड़े मगरमच्छ थे। सियारों की चीखों से नदी बहुत भयानक लग रही थी। यह हजारों नाचते हुए भूत-प्रेतों से व्याप्त थी। | mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्जुन ने कायरों में भय उत्पन्न करने वाली वैतरणी के समान एक अत्यन्त भयानक, प्रचण्ड और रक्तरंजित नदी प्रवाहित की, जो सैकड़ों निर्जीव योद्धाओं के शरीरों को बहा ले गई। उसकी मज्जा और चर्बी ही उसकी कीचड़ थी। रक्त ही बहता था और उसकी लहरें उठती थीं। योद्धाओं के प्राणों और अस्थियों से व्याप्त वह नदी अथाह प्रतीत होती थी। उसके बाल नदी के तृण और घास थे। योद्धाओं के कटे हुए सिर और भुजाएँ किनारों पर छोटी-छोटी चट्टानों का काम दे रही थीं। छाती की टूटी हुई हड्डियों के कारण वह दुर्गम हो रही थी। उसके भीतर विचित्र ध्वजाएँ और पताकाएँ पड़ी थीं। वह छत्रों और धनुषरूपी तरंगों की मालाओं से सुशोभित थी। निर्जीव प्राणी उसके विशाल शरीर के अंग थे, वह हाथियों के मृत शरीरों से भरी हुई थी, रथरूपी सैकड़ों नावें उस पर तैर रही थीं, घोड़ों के समूह उसके तट थे, रथों के पहिये, जुए, डण्डे, धुरे और गदाओं के कारण नदी अत्यंत दुर्गम प्रतीत हो रही थी। इसमें प्रवेश करना कठिन था क्योंकि यह भालों, तलवारों, बरछियों, कुल्हाड़ियों और बाणों के रूप में सर्पों से भरा हुआ था। इसके अंदर कौए और कौए जैसे जानवर रहते थे, जो बड़े मगरमच्छ थे। मगरमच्छ रूपी सियारों के निवास के कारण इसकी क्रूरता और भी बढ़ गई थी। गिद्ध इसमें भयंकर और बड़े मगरमच्छ थे। सियारों की चीखों से नदी बहुत भयानक लग रही थी। यह हजारों नाचते हुए भूत-प्रेतों से व्याप्त थी।
Arjun unleashed a very terrifying, furious and bloody river, like the Vaitarni that instills fear in cowards, which carried away hundreds of lifeless bodies of lifeless warriors. Its marrow and fat were its mud. It was blood that flowed and its waves arose. That river, permeated by the vital organs and bones of the warriors, seemed unfathomable. Its hair was the river's weeds and grass. The severed heads and arms of the warriors served as small rocks on the banks. It was becoming inaccessible due to the broken chest bones. Strange flags and banners were lying inside it. It was decorated with garlands of waves in the form of umbrellas and bows. Lifeless creatures were the parts of its huge body, it was filled with dead bodies of elephants, hundreds of boats in the form of chariots were floating on it, groups of horses were its banks, the river appeared very inaccessible due to the wheels, yokes, staffs, axles and maces of the chariots. It was difficult to enter it as it was filled with spears, swords, spears, axes and serpents in the form of arrows. Animals like crows and crows were the big crocodiles living inside it. Its ferocity had increased further due to the residence of jackals in the form of crocodiles. The vultures were the fierce and big crocodiles in it. The river appeared very terrifying due to the shrieks of the jackals. It was pervaded by thousands of dancing ghosts and spirits.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥