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mahabharat 7.146.3-4h: उस युद्धस्थल में कुन्तीपुत्र अर्जुन एक साथ सभी दिशाओं में देखते हुए घूम रहे थे और सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग करने में अपनी कुशलता का प्रदर्शन कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 3-4h
 
 
श्लोक  7.146.3-4h 
स रणे व्यचरत् पार्थ: प्रेक्षमाणो धनंजय:॥ ३॥
युगपद् दिक्षु सर्वासु सर्वाण्यस्त्राणि दर्शयन्।
 
 
अनुवाद
उस युद्धस्थल में कुन्तीपुत्र अर्जुन एक साथ सभी दिशाओं में देखते हुए घूम रहे थे और सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग करने में अपनी कुशलता का प्रदर्शन कर रहे थे।
 
In that battle-field, Kunti's son Arjun was roaming around looking in all directions simultaneously and demonstrating his skill in using all kinds of weapons. 3 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)