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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 135
 
 
श्लोक  7.146.135 
हतं जयद्रथं दृष्ट्वा तव पुत्रा नराधिप।
दु:खादश्रूणि मुुमुचुर्निराशाश्चाभवन् जये॥ १३५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जयद्रथ को मारा गया देखकर आपके पुत्र दुःख से रोने लगे और अपनी विजय की आशा खो बैठे।
 
O Lord of men! On seeing Jayadratha killed, your sons began to cry in sorrow and lost hope of their victory. 135.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)