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mahabharat 7.146.130: शत्रुदमन महाराज! पुत्र का सिर पृथ्वी पर गिरते ही राजा वृद्धक्षत्र का सिर भी सौ टुकड़ों में टूट गया ॥130॥   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  7.146.130 
ततस्तस्य नरेन्द्रस्य पुत्रमूर्धनि भूतले।
गते तस्यापि शतधा मूर्धागच्छदरिंदम॥ १३०॥
 
 
अनुवाद
शत्रुदमन महाराज! पुत्र का सिर पृथ्वी पर गिरते ही राजा वृद्धक्षत्र का सिर भी सौ टुकड़ों में टूट गया ॥130॥
 
Shatrudaman Maharaj! As soon as the son's head fell on the earth, King Vridhakshatra's head also broke into a hundred pieces. 130॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)