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mahabharat 7.146.129: हे भरतनन्दन! जब वृद्धक्षत्र जप समाप्त करके सहसा उठे, तब वह सिर उनकी गोद से भूमि पर गिर पड़ा॥129॥   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  7.146.129 
कृतजप्यस्य तस्याथ वृद्धक्षत्रस्य भारत।
प्रोत्तिष्ठतस्तत् सहसा शिरोऽगच्छद् धरातलम्॥ १२९॥
 
 
अनुवाद
हे भरतनन्दन! जब वृद्धक्षत्र जप समाप्त करके सहसा उठे, तब वह सिर उनकी गोद से भूमि पर गिर पड़ा॥129॥
 
O Bharatanandan! When Vriddhakshatra suddenly got up after finishing his chanting, that head fell from his lap to the ground.॥ 129॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)