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mahabharat 7.146.124: उस समय पाण्डुपुत्र अर्जुन ने एक के बाद एक बहुत से बाण चलाकर उस मस्तक को कदम्ब पुष्प के समान सुन्दर बना दिया और साथ ही ऊपर वर्णित छः महारथियों के साथ युद्ध भी करता रहा॥124॥   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 124
 
 
श्लोक  7.146.124 
शरै: कदम्बकीकृत्य काले तस्मिंश्च पाण्डव:।
योधयामास तांश्चैव पाण्डव: षण्महारथान्॥ १२४॥
 
 
अनुवाद
उस समय पाण्डुपुत्र अर्जुन ने एक के बाद एक बहुत से बाण चलाकर उस मस्तक को कदम्ब पुष्प के समान सुन्दर बना दिया और साथ ही ऊपर वर्णित छः महारथियों के साथ युद्ध भी करता रहा॥124॥
 
At that time Arjuna, son of Pandu, shot many arrows one after another and made that head look like a Kadamba flower. At the same time he also kept fighting with the six maharathis mentioned above.॥ 124॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)