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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  7.146.122 
स तु गाण्डीवनिर्मुक्त: शर: श्येन इवाशुग:।
छित्त्वा शिर: सिन्धुपतेरुत्पपात विहायसम्॥ १२२॥
 
 
अनुवाद
गणिव धनुष से छूटे उस तीव्र बाण ने सिन्धुराज का सिर काट डाला और उसे गरुड़ की भाँति आकाश में उड़ा ले गया।
 
That swift arrow shot from the Gānīva bow cut off the head of the King of Sindhu and carried him away into the sky like an eagle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)