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mahabharat 7.146.118: कुरुश्रेष्ठ! राजा वृद्धक्षत्र तपस्या में लीन हैं। आप दिव्यास्त्र का आश्रय लेकर ऐसा प्रयत्न करें कि उन्हें इसका पता न चले ॥118॥   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  7.146.118 
यथा चेदं न जानीयात् स राजा तपसि स्थित:।
तथा कुरु कुरुश्रेष्ठ दिव्यमस्त्रमुपाश्रित:॥ ११८॥
 
 
अनुवाद
कुरुश्रेष्ठ! राजा वृद्धक्षत्र तपस्या में लीन हैं। आप दिव्यास्त्र का आश्रय लेकर ऐसा प्रयत्न करें कि उन्हें इसका पता न चले ॥118॥
 
Kurushrestha! King Vridhakshatra is engaged in penance. You take the shelter of Divyastra and make such an effort that he does not come to know about this. 118॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)