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mahabharat 7.146.115-116: अतः हे शत्रुघ्न! हे अद्भुत कर्म करने वाले! इस महायुद्ध में किसी भयंकर दिव्यास्त्र से कुण्डलों सहित सिन्धुराज जयद्रथ का मस्तक काटकर इस वृद्धक्षत्र की गोद में डाल दो। भरत! तुम भीमसेन के छोटे भाई हो (अतः तुम कुछ भी कर सकते हो)।॥115-116॥   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 115-116
 
 
श्लोक  7.146.115-116 
तस्माज्जयद्रथस्य त्वं शिरश्छित्त्वा महामृधे।
दिव्येनास्त्रेण रिपुहन् घोरेणाद्भुतकर्मणा॥ ११५॥
सकुण्डलं सिन्धुपते: प्रभञ्जनसुतानुज।
उत्सङ्गे पातयस्वास्य वृद्धक्षत्रस्य भारत॥ ११६॥
 
 
अनुवाद
अतः हे शत्रुघ्न! हे अद्भुत कर्म करने वाले! इस महायुद्ध में किसी भयंकर दिव्यास्त्र से कुण्डलों सहित सिन्धुराज जयद्रथ का मस्तक काटकर इस वृद्धक्षत्र की गोद में डाल दो। भरत! तुम भीमसेन के छोटे भाई हो (अतः तुम कुछ भी कर सकते हो)।॥115-116॥
 
‘Therefore, O Shatrughan! O you who performs wonderful deeds, cut off the head of Sindhuraj Jayadratha along with his earrings in this great war with the help of some dreadful divine weapon and drop it in the lap of this Vriddhakshatra. Bharata! You are the younger brother of Bhimasena (therefore you can do anything).॥ 115-116॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)