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mahabharat 7.146.114: कपिध्वज अर्जुन! वह तेजस्वी राजा वृद्धक्षत्र इस समय इस समन्तपंचक क्षेत्र के बाहर घोर एवं कठोर तप कर रहा है ॥114॥   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  7.146.114 
सोऽयं तप्यति तेजस्वी तपो घोरं दुरासदम्।
समन्तपञ्चकादस्माद् बहिर्वानरकेतन॥ ११४॥
 
 
अनुवाद
कपिध्वज अर्जुन! वह तेजस्वी राजा वृद्धक्षत्र इस समय इस समन्तपंचक क्षेत्र के बाहर घोर एवं कठोर तप कर रहा है ॥114॥
 
Kapidhwaj Arjun! That brilliant king Vridhakshatra is currently doing severe and rigorous penance outside this Samantapanchak area. 114॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)