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mahabharat 7.146.111-112: जो कोई युद्ध के लिए तैयार होकर भारी बोझ लेकर मेरे इस पुत्र का सिर भूमि पर गिराएगा, उसका सिर भी सैकड़ों टुकड़ों में बंट जाएगा, इसमें संशय नहीं है॥111-112॥   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 111-112
 
 
श्लोक  7.146.111-112 
संग्रामे युध्यमानस्य वहतो महतीं धुरम्॥ १११॥
धरण्यां मम पुत्रस्य पातयिष्यति य: शिर:।
तस्यापि शतधा मूर्धा फलिष्यति न संशय:॥ ११२॥
 
 
अनुवाद
जो कोई युद्ध के लिए तैयार होकर भारी बोझ लेकर मेरे इस पुत्र का सिर भूमि पर गिराएगा, उसका सिर भी सैकड़ों टुकड़ों में बंट जाएगा, इसमें संशय नहीं है॥111-112॥
 
Whoever, being ready for battle and carrying a heavy load, will drop the head of this son of mine on the ground, his head too will break into hundreds of pieces, there is no doubt about it.'॥ 111-112॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)