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mahabharat 7.146.110-111h: यह सुनकर शत्रुओं का नाश करने वाले राजा वृद्धछत्र ने बहुत देर तक विचार किया, फिर पुत्र-प्रेम से प्रेरित होकर उन्होंने अपने कुल के सभी भाइयों से इस प्रकार कहा:   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 110-111h
 
 
श्लोक  7.146.110-111h 
एतच्छ्रुत्वा सिन्धुराजो ध्यात्वा चिरमरिंदम:॥ ११०॥
ज्ञातीन् सर्वानुवाचेदं पुत्रस्नेहाभिचोदित:।
 
 
अनुवाद
यह सुनकर शत्रुओं का नाश करने वाले राजा वृद्धछत्र ने बहुत देर तक विचार किया, फिर पुत्र-प्रेम से प्रेरित होकर उन्होंने अपने कुल के सभी भाइयों से इस प्रकार कहा:
 
Hearing this, King Vriddhachhatra, the destroyer of enemies, pondered for a long time. Then, motivated by the love for his son, he spoke to all his brothers in the clan as follows:
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)