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mahabharat 7.146.11-12h: तत्पश्चात् दिव्यास्त्रों के ज्ञाता अर्जुनरूपी सूर्यदेव द्वारा छिड़की हुई बाणों की किरणों ने शत्रु सेना को उसी प्रकार व्याकुल कर दिया, जैसे सूर्यदेव की किरणें सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को व्याप्त कर देती हैं ॥11 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  7.146.11-12h 
ततो दिव्यास्त्रविदुषा प्रहिता: सायकांशव:॥ ११॥
समाप्लवन् द्विषत्सैन्यं लोकं भानोरिवांशव:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् दिव्यास्त्रों के ज्ञाता अर्जुनरूपी सूर्यदेव द्वारा छिड़की हुई बाणों की किरणों ने शत्रु सेना को उसी प्रकार व्याकुल कर दिया, जैसे सूर्यदेव की किरणें सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को व्याप्त कर देती हैं ॥11 1/2॥
 
Thereafter, the rays of arrows sprinkled by the Sun in the form of Arjuna, the knower of divine weapons, inundated the enemy army in the same way as the rays of the Sun pervade the entire universe. ॥11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)