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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  7.146.107 
जयद्रथममित्रघ्नं वागुवाचाशरीरिणी।
नृपमन्तर्हिता वाणी मेघदुन्दुभिनि:स्वना॥ १०७॥
 
 
अनुवाद
उसके जन्म के समय मेघ के समान गम्भीर वाणी वाली एक अदृश्य दिव्य वाणी ने शत्रुओं का संहार करने वाले जयद्रथ के विषय में राजा से यह कहा ॥107॥
 
At the time of his birth, an invisible celestial voice with a voice as deep as that of a cloud addressed the king about Jayadratha, the slayer of enemies, and said this:॥107॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)