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mahabharat 7.146.106: सिंधुराज के पिता वृद्धक्षत्र इस जगत् में प्रसिद्ध हैं। बहुत समय के बाद उन्होंने इस सिन्धुराज जयद्रथ को अपना पुत्र स्वीकार किया। 106॥   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  7.146.106 
वृद्धक्षत्र: सैन्धवस्य पिता जगति विश्रुत:।
स कालेनेह महता सैन्धवं प्राप्तवान् सुतम्॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
सिंधुराज के पिता वृद्धक्षत्र इस जगत् में प्रसिद्ध हैं। बहुत समय के बाद उन्होंने इस सिन्धुराज जयद्रथ को अपना पुत्र स्वीकार किया। 106॥
 
Sindhuraj's father Vridhakshatra is famous in this world. After a long time, he accepted this Sindhuraj Jayadratha as his son. 106॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)