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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  7.146.104 
अब्रवीच्च पुनस्तत्र त्वरमाणो जनार्दन:।
धनंजय शिरश्छिन्धि सैन्धवस्य दुरात्मन:॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
उस समय भगवान श्रीकृष्ण पुनः अधीर होकर बोले, 'धनंजय! तुम शीघ्र ही उस दुष्टबुद्धि सिन्धुराज का सिर काट डालो।
 
At that time Lord Krishna again became impatient and spoke, 'Dhananjaya! You should quickly cut off the head of that evil-minded Sindhuraj.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)