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mahabharat 7.145.92: भारत! उस अत्यन्त भीषण और कोलाहलपूर्ण युद्ध में भी, जिसने सबको मोहित कर दिया था, युवराज अर्जुन को तनिक भी चिन्ता नहीं हुई। वे बाणों की वर्षा करते रहे॥92॥   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  7.145.92 
ततस्तु तस्मिंस्तुमुले समुत्थिते
सुदारुणे भारत मोहनीये।
नोऽमुह्यत प्राप्य स राजपुत्र:
किरीटमाली व्यसृजच्छरौघान्॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
भारत! उस अत्यन्त भीषण और कोलाहलपूर्ण युद्ध में भी, जिसने सबको मोहित कर दिया था, युवराज अर्जुन को तनिक भी चिन्ता नहीं हुई। वे बाणों की वर्षा करते रहे॥92॥
 
Bhaarat! Even in the face of that extremely horrific and tumultuous battle that mesmerized everyone, the crowned prince Arjuna was not at all impressed. He kept on showering his arrows.॥92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)