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mahabharat 7.145.84-85h: महाराज! कर्ण को इस प्रकार रथहीन देखकर अश्वत्थामा ने उसे रथ पर बिठा लिया और वह पुनः अर्जुन से युद्ध करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 84-85h
 
 
श्लोक  7.145.84-85h 
तं तथा विरथं दृष्ट्वा रथमारोप्य तं तदा॥ ८४॥
अश्वत्थामा महाराज भूयोऽर्जुनमयोधयत्।
 
 
अनुवाद
महाराज! कर्ण को इस प्रकार रथहीन देखकर अश्वत्थामा ने उसे रथ पर बिठा लिया और वह पुनः अर्जुन से युद्ध करने लगा।
 
Maharaj! Seeing Karna thus without a chariot, Ashvatthama made him sit on the chariot and he once again started fighting with Arjun. 84 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)