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mahabharat 7.145.83-84h: इतना ही नहीं, आपके पुत्र की आँखों के सामने ही उसने कर्ण को बाणों से ढक दिया। घोड़े और सारथि के मारे जाने के बाद, युद्धभूमि में बाणों से आच्छादित कर्ण बाणों के जाल से मोहित हो गया और यह सोच भी नहीं सका कि अब क्या करे।   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 83-84h
 
 
श्लोक  7.145.83-84h 
छादयामास स शरैस्तव पुत्रस्य पश्यत:।
संछाद्यमान: समरे हताश्वो हतसारथि:॥ ८३॥
मोहित: शरजालेन कर्तव्यं नाभ्यपद्यत।
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, आपके पुत्र की आँखों के सामने ही उसने कर्ण को बाणों से ढक दिया। घोड़े और सारथि के मारे जाने के बाद, युद्धभूमि में बाणों से आच्छादित कर्ण बाणों के जाल से मोहित हो गया और यह सोच भी नहीं सका कि अब क्या करे।
 
Not only this, in front of your son's eyes he covered Karna with arrows. After the horse and charioteer were killed, Karna, covered with arrows in the battlefield, was mesmerized by the net of arrows and could not even think what to do next. 83 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)