Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.145.8: महाराज! जिनके बाण कभी व्यर्थ नहीं जाते, वे धनुष से छूटे हुए बाणों के समान अपने घोड़ों पर सवार होकर जयद्रथ की ओर दौड़ते हुए अर्जुन को देखकर कौरव सेना के प्रधान योद्धा बड़े वेग से दौड़े। | mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं प्रयान्तममोघेषुमुत्पतद्भिरिवाशुगै:।
त्वरमाणा महाराज सेनामुख्या: समाद्रवन्॥ ८॥
अनुवाद
महाराज! जिनके बाण कभी व्यर्थ नहीं जाते, वे धनुष से छूटे हुए बाणों के समान अपने घोड़ों पर सवार होकर जयद्रथ की ओर दौड़ते हुए अर्जुन को देखकर कौरव सेना के प्रधान योद्धा बड़े वेग से दौड़े।
Maharaj! Seeing Arjuna, whose arrows never go waste, flying like arrows shot from a bow, flying towards Jayadratha on his horses, the chief warriors of the Kaurava army ran with great speed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥