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mahabharat 7.145.74: तब शत्रुशिकारी कर्ण ने अपने आक्रमण का बदला लेने की इच्छा से पुनः अर्जुन को हजारों बाणों से आच्छादित कर दिया॥74॥   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  7.145.74 
कर्णोऽपि द्विषतां हन्ता छादयामास फाल्गुनम्।
सायकैर्बहुसाहस्रै: कृतप्रतिकृतेप्सया॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
तब शत्रुशिकारी कर्ण ने अपने आक्रमण का बदला लेने की इच्छा से पुनः अर्जुन को हजारों बाणों से आच्छादित कर दिया॥74॥
 
Then Karna, the enemy hunter, wishing to take revenge for his attack, once again covered Arjun with thousands of arrows. 74॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)