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mahabharat 7.145.72: इसके अतिरिक्त, अर्जुन ने भी आवश्यकता पड़ने पर शीघ्रतापूर्वक युद्धभूमि में सारथीपुत्र को मारने के लिए उस पर सूर्य के समान तेजस्वी बाण चलाया।   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  7.145.72 
वधार्थं चास्य समरे सायकं सूर्यवर्चसम्।
चिक्षेप त्वरया युक्तस्त्वराकाले धनंजय:॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
इसके अतिरिक्त, अर्जुन ने भी आवश्यकता पड़ने पर शीघ्रतापूर्वक युद्धभूमि में सारथीपुत्र को मारने के लिए उस पर सूर्य के समान तेजस्वी बाण चलाया।
 
Also, Arjuna, being quick on the occasion of need, shot an arrow as bright as the Sun at the son of a charioteer to kill him on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)