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mahabharat 7.145.64-65h: हे आर्य! वहाँ हमने उस सारथीपुत्र का अद्भुत पराक्रम देखा, जिसने कुपित होकर अकेले ही युद्धभूमि में तीन महारथियों को रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 64-65h
 
 
श्लोक  7.145.64-65h 
तत्राद्भुतमपश्याम सूतपुत्रस्य मारिष॥ ६४॥
यदेक: समरे क्रुद्धस्त्रीन् रथान् पर्यवारयत्।
 
 
अनुवाद
हे आर्य! वहाँ हमने उस सारथीपुत्र का अद्भुत पराक्रम देखा, जिसने कुपित होकर अकेले ही युद्धभूमि में तीन महारथियों को रोक दिया।
 
O Arya! There we saw the amazing valour of the son of a charioteer who, enraged, single-handedly stopped three mighty warriors on the battlefield. 64 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)