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mahabharat 7.145.6: "हे भगवान कृष्ण! सूर्यास्त तक इन घोड़ों को यथाशीघ्र हाँकते रहो, जिससे मेरी प्रतिज्ञा पूरी हो और मैं जयद्रथ का वध कर सकूँ।" ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.145.6 
तथा नाभ्येति सूर्योऽस्तं यथा सत्यं भवेद् वच:।
चोदयाश्वांस्तथा कृष्ण यथा हन्यां जयद्रथम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
"हे भगवान कृष्ण! सूर्यास्त तक इन घोड़ों को यथाशीघ्र हाँकते रहो, जिससे मेरी प्रतिज्ञा पूरी हो और मैं जयद्रथ का वध कर सकूँ।" ॥6॥
 
"Lord Krishna! Till the sun sets, drive these horses as quickly as possible so that my vow may be fulfilled and I may kill Jayadratha." ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)