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mahabharat 7.145.56-57h: सूर्यास्त के लिए उत्सुक उन पराक्रमी योद्धाओं ने बड़ी शीघ्रता से अपने रथों को चारों ओर से एक दूसरे के निकट खड़ा कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  7.145.56-57h 
श्लिष्टं च सर्वतश्चक्रू रथमण्डलमाशु ते॥ ५६॥
सूर्यास्तमनमिच्छन्तस्त्वरमाणा महारथा:।
 
 
अनुवाद
सूर्यास्त के लिए उत्सुक उन पराक्रमी योद्धाओं ने बड़ी शीघ्रता से अपने रथों को चारों ओर से एक दूसरे के निकट खड़ा कर दिया।
 
Those mighty warriors, eager for the sunset, arranged their chariots close together on all sides in great haste. 56 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)