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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.145.5 
एतद्धि पुरुषव्याघ्र महदभ्युद्यतं मया।
कार्यं संरक्ष्यते चैष कुरुसेनामहारथै:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
मानसिंह! मैंने एक बहुत बड़े कार्य के लिए यह प्रयत्न आरम्भ किया है। कौरव सेना के महारथी इस जयद्रथ की रक्षा कर रहे हैं।
 
Mansingh! I have started this endeavor for a very big task. The great warriors of the Kaurava army are protecting this Jayadratha. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)