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mahabharat 7.145.37-38h: बड़े-बड़े हाथी-घोड़े जगह-जगह गिरने लगे। झंडे, छत्र, धनुष, पंखे और योद्धाओं के सिर गिरने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  7.145.37-38h 
हया वारणमुख्याश्च प्रापतन्त समन्तत:॥ ३७॥
ध्वजाश्छत्राणि चापानि चामराणि शिरांसि च।
 
 
अनुवाद
बड़े-बड़े हाथी-घोड़े जगह-जगह गिरने लगे। झंडे, छत्र, धनुष, पंखे और योद्धाओं के सिर गिरने लगे।
 
Big elephants and horses started collapsing everywhere. Flags, umbrellas, bows, fans and heads of warriors started falling off. 37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)