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mahabharat 7.145.3-4: श्रीकृष्ण! अब इन घोड़ों को शीघ्रता से उस दिशा में ले चलो जहाँ राजा जयद्रथ खड़ा है। कमलनयन! सुना है कि वह इस समय तीन धर्मों में स्थित है। निष्पाप केशव! कृपया मेरी प्रतिज्ञा पूरी करें। महाबाहो! सूर्यदेव शीघ्रता से पश्चिम दिशा की ओर जा रहे हैं। 3-4।   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  7.145.3-4 
चोदयाश्वान् भृशं कृष्ण यतो राजा जयद्रथ:।
श्रूयते पुण्डरीकाक्ष त्रिषु धर्मेषु वर्तते॥ ३॥
प्रतिज्ञां सफलां चापि कर्तुमर्हसि मेऽनघ।
अस्तमेति महाबाहो त्वरमाणो दिवाकर:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण! अब इन घोड़ों को शीघ्रता से उस दिशा में ले चलो जहाँ राजा जयद्रथ खड़ा है। कमलनयन! सुना है कि वह इस समय तीन धर्मों में स्थित है। निष्पाप केशव! कृपया मेरी प्रतिज्ञा पूरी करें। महाबाहो! सूर्यदेव शीघ्रता से पश्चिम दिशा की ओर जा रहे हैं। 3-4।
 
Sri Krishna! Now drive these horses quickly in the direction where King Jayadratha is standing. Kamalnayan! It is heard that he is present in three dharmas at this time. Sinless Keshav! Please fulfill my promise. Mahabaho! The Sun God is rapidly going towards the west. 3-4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)