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mahabharat 7.145.27: इस समय मेरे शरीर का कोई भी अंग किसी प्रकार की हलचल नहीं कर रहा है। बड़े-बड़े बाणों की अग्नि से मैं तड़प रहा हूँ, फिर भी मैं अपनी पूरी शक्ति से युद्ध करूँगा, क्योंकि मेरा जीवन केवल आपके लिए ही है॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.145.27 
नाङ्गमिङ्गति किंचिन्मे संतप्तस्य महेषुभि:।
योत्स्यामि तु यथाशक्त्या त्वदर्थं जीवितं मम॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इस समय मेरे शरीर का कोई भी अंग किसी प्रकार की हलचल नहीं कर रहा है। बड़े-बड़े बाणों की अग्नि से मैं तड़प रहा हूँ, फिर भी मैं अपनी पूरी शक्ति से युद्ध करूँगा, क्योंकि मेरा जीवन केवल आपके लिए ही है॥ 27॥
 
‘At this moment, none of my body parts are making any kind of movement. I am tormented by the fire of big arrows, but I will fight to the best of my ability because my life is only for you.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)